Emotional Shayari

  • Galib shayari

    मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान, जो अपने तख़ल्लुस ग़ालिब से जाने जाते हैं, उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के एक महान शायर थे। इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको दिया जाता है। यद्दपि इससे पहले के वर्षो में मीर तक़ी “मीर” भी इसी वजह से जाने जाता है। ग़ालिब के लिखे पत्र, जो उस समय प्रकाशित नहीं हुए थे, को भी उर्दू लेखन का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है। ग़ालिब को भारत और पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाना जाता है। उन्हे दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला का ख़िताब मिला।

    ग़ालिब (और असद) तख़ल्लुस से लिखने वाले मिर्ज़ा मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे। आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में अपनी ज़िन्दगी गुजारने वाले ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता है। उन्होने अपने बारे में स्वयं लिखा था कि दुनिया में यूं तो बहुत से अच्छे शायर हैं, लेकिन उनकी शैली सबसे निराली है:

    हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे

    कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और

    ♥♥♥उल्फत की शमा दिल में जलाने में लगे हैं♥♥♥
    हम वादा ए वफ़ा फिर से निभाने में लगे हैं
    तस्वीर उसकी मेरी किताबों में है मगर
    तस्वीर ए सनम दिल में बनाने में लगे हैं
    झांका नहीं हैं उसने गिरेबान में अपनी ओ
    आईना अब मुझको दिखाने में लगे हैं
    हर कोई है मुझे नज़रों से गिराने में लगे है
    हम रूठें हुए यार मनाने में लगे हैं
  • (no title)

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