Shayari

Love Ghazals | Urdu Ghazals | Heart Touching Ghazals | Sad Ghazals

Ghazalsतूने छुआ था जिन्हें उन फूलों को खिलना अभी बाकी है|
     बड़े वक्त से मुझको खुद से मिलना अभी बाकी है।
  इबादत भी की है,नमाज़ें भी कीं हैं,मुख़्तसर में कहता हूँ,
    तुझसे मिलने की चाहत में उस दरगाह तक चलना अभी बाकी है।
  तुमने कहा भुला दो मुझे बस इतनी सी ही तो बात है,
     मैं मर गया अरसों पहले बस जलना अभी बाकी है।
 छुपके रोना तो जैसे एक आदत सी हो गई है मेरी,
      आखिर में तेरे आगे आंसू का आँख से निकलना अभी बाकी है। 
सुना है मेरी गज़लें दूसरों के लिए मददगार होतीं हैं,
    पर मुख़्तसर में खुद के अरमानों को मसलना अभी बाकी है। 
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